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Tuesday, April 25, 2023

डीएम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा... नीतीश सरकार ने साफ किया रिहाई का रास्‍ता! जानिए- कौन है आनंद मोहन?

आनंद मोहन का जन्म बिहार के सहरसा जिले के पचगछिया गांव में हुआ था. 1974 में जेपी आंदोलन से आनंद मोहन ने राजनीति में कदम रखा और इमरजेंसी के दौरान उन्हें दो साल तक जेल में रहना पड़ा. 1980 में उसने समाजवादी क्रांति सेना की स्थापना की. इसके बाद हत्या, लूट, अपहरण के कई मामलों में उसका नाम शामिल होता चला गया. और फिर 1990 में आनंद मोहन की राजनीति में एंट्री हुई. आनंद मोहन, गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के दोषी है और उम्रक़ैद की सज़ा काट रहा है. फिलहाल आनंद मोहन परोल पर बाहर है और आज ही उसे सहरसा जेल वापस जाना है. हालांकि, इस बीच बिहार सरकार ने अपने एक क़ानून में बदलाव किया है, जिसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्‍ता साफ हो गया है.  

खुद की पार्टी बनाई, पत्‍नी भी रही सांसद 
आनंद मोहन ने जब राजनीति में उतरने का फैसला किया, तो उत्‍तरी बिहार में वह बाहुबली के रूप में जाना जाता था. ऐसे में उसे जनता दल ने माहिषी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा और वह जीत भी गया. इसके बाद आनंद मोहन ने 1993 में अपनी खुद की 'बिहार पीपुल्स पार्टी' बना ली और बाद में समता पार्टी से हाथ मिला लिया. 1994 में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी राजनीति के अखाड़े में कूद पड़ीं और वैशाली लोकसभा सीट से उपचुनाव जीत लिया. 1996 में आनंद मोहन ने शिवहर लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और रसूख के दम पर जेल में रहते हुए जीत हासिल की. ऐसे ही 1999 में आनंद मोहन ने एक बार फिर सीट से जीत हासिल कर अपना दमखम दिखाया. 

कौन है आनंद मोहन?

  • गोपालगंज की डीएम की हत्या का दोषी
  • हत्या के केस उम्रक़ैद की सज़ा
  • हत्या, लूट, अपहरण के कई मामले
  • 1990: पहली बार सहरसा से JDU विधायक
  • 1993: बिहार पीपुल्स पार्टी बनाई
  • 1994: पत्नी लवली आनंद वैशाली से सांसद बनीं
  • 1996, 1998: शिवहर से 2 बार सांसद रहे

गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में फिलहाल जेल में बंद 
- आनंद मोहन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अस्वीकार किया जा चुका है. 
- आनंद मोहन एक जमाने में उत्तरी बिहार के कोसी क्षेत्र के बाहुबली कहलाते थे.
- राजनीति में उनकी एंट्री 1990 में हुई। तब पहली बार सहरसा से MLA बने थे.
- पप्पू यादव से हिंसक टकराव की घटनाएं देश भर में सुर्खिया बनीं थी. 
- 1994 में उनकी वाइफ लवली आनंद ने भी वैशाली लोकसभा का उपचुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की थी.
- आनंद मोहन ने जेल से ही 1996 का लोकसभा चुनाव समता पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की थी.
- 2 बार सांसद रहे आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी एक बार सांसद रह चुकी हैं.

सरेआम हुई थी डीएम कृष्‍णैय्या की हत्‍या 
साल 1994 में बिहार पीपल्स पार्टी के नेता और गैंगस्टर छोटन शुक्ला को पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया. उसकी शवयात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. इस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन कर रहे थे. इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैय्या पहुंचे थे. इसी दौरान दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और डीएम को सरेआम गोली मार दी गई. आनंद मोहन पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा और दोषी साबित होने के बाद फांसी की सजा सुनाई गई. बताया जाता है कि आनंद मोहन ने ही डीएम जी. कृष्णैय्या को उनकी गाड़ी से निकाला और भीड़ के हवाले कर दिया था.



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